Friday, May 23, 2014

ओ पंछी, बहुत देर हो चुकी

ओ पंछी, बहुत देर हो चुकी,
लौट आ अपने घर को,
तेरे इंतजार में पड़ा कोई,
बात जोह रहा तेरी।
ख्वाब बुन रहा तेरी यादों में,
ओ पंछी, बहुत देर हो चुकी।
तू लौट आ अपने आसियाने में,
आसियाना तुम बिन सूना यहाँ,
तू नहीं यहाँ तो दिल भी सूना हैं।
तू दूर न चली जाना मुझसे,
नए आसियाने को देख कर।
तू तनिक इधर भी देख,
ये आसियाना डूबा है तेरी यादों में,
ओ पंछी, बहुत देर हो चुकी,

तू लौट आ मेरे दिल में।

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