ओ पंछी, बहुत देर हो चुकी,
लौट आ अपने
घर को,
तेरे
इंतजार में पड़ा कोई,
बात जोह
रहा तेरी।
ख्वाब बुन
रहा तेरी यादों में,
ओ पंछी, बहुत देर हो चुकी।
तू लौट आ
अपने आसियाने में,
आसियाना
तुम बिन सूना यहाँ,
तू नहीं
यहाँ तो दिल भी सूना हैं।
तू दूर न
चली जाना मुझसे,
नए आसियाने
को देख कर।
तू तनिक
इधर भी देख,
ये आसियाना
डूबा है तेरी यादों में,
ओ पंछी, बहुत देर हो चुकी,
तू लौट आ
मेरे दिल में।