Wednesday, March 25, 2015

एक कसक सी है...

एक कसक सी है,
दबी कहीं,
सीने की गहराइयों में,
पुरे करने को,
ढूंढता हुआ तुझे,
चलता जाता हूँ।
अनजान-सी राहों में,
अकेला पाकर खुद को,
याद आते है वो आसुंओं के साथ,
बातें बिना रुके हुए।
शायद तूने सोचा होगा,
भूल जाऊँगा मैं,
मगर अब भी,
तुझसे बात करने की,
दिल में एक कसक सी है।
यह अधूरी-सी कसक,
न जाने,
कहाँ ले जाएगी मुझे,
शायद कभी तो होगी,
तुझसे वो बातें फिर,
शायद अधूरी-सी वो बातें,
पूरी हो जाएगी यहीं।

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